चुनाव और फर्जी खबरें

Prakash Chandra
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जैसे हर त्यौहार के कुछ विशेष पकवान होते हैं, जैसे हर मौसम की के कुछ विशेष फल और सब्जियां होती हैं, ठीक वैसे ही चुनाव में फर्जी खबरों का भी विशेष महत्व और बोलबाला है, लोकतंत्र का पर्व कहे जाने वाले इस चुनाव में फर्जी खबरों का चलन इतना पुराना नहीं है, बस ये समझ लो जब से देश में  खबरों का डिजिटलाइजेशन हुआ है,और सोशल मीडिया में हमारा उठना-बैठना हुआ है तब से ही फर्जी खबरों का चलन बढा है।

वैसे तो फर्जी खबरें हमें हर मौसम में बदस्तूर मिलती हैं, पर चुनावी मौसम में इनका कुछ खास ही महत्व और मांग है। आलम ये है जनाब असली खबरों के बीच फर्जी खबरों को अलग करना उतना ही मुश्किल है,जितना साबूदाने में से यूरिया।

हम और आप ना जाने कब से और कितने फर्जी खबरों  से अपना ज्ञान वर्धन कर चुके हैं, और कितनों के ज्ञान और जानकारियां दुरस्त कर चुके हैं। इसका अंदाजा हममें से किसी को नहीं है। हाँ ये जरूर है जिसने ये फर्जी खबर बनाई और जिसके लिए बनाई वो सब बेहतर जानते हैं।

चँकि खबरों के बाजार में खबरों की परख करना बहुत ही मुश्किल है,पर देश के हर  बड़े मुद्दे जिसमें सियासत की सिरकत हो फर्जी खबरों का फैलना स्वभाविक ही है। आप देश का कोई भी बड़े मुद्दों की पड़ताल कर लें उससे जुड़ी कई फर्जी खबरें आपने जरूर देखी होंगी। भले ही आप ये ना जान पाये होंगे की ये खबर फर्जी है। भले ही आप ये ना समझ पायें हों कि खबर फर्जी है। ज्यादा पीछे नहीं जाते हैं इसी बीते साल 2019 के लोकसभा चुनाव की शुरूआत भी फर्जी खबर से ही हुई।

खबर चुनाव की तारीख को लेकर बनायी गयी थी जिसमें 7 मार्च से चुनाव होने की बात कही गयी थी बाद में  चुनाव आयोग ने इस खबर को फर्जी बताकर पहला चुनाव 10 मार्च को बताया। अब इस खबर से किस को क्या फायदा हुआ ये पता नहीं चल सका। इसके बाद एक के बाद एक कई फर्जी खबरों ने चुनाव की रौनक बढ़ाई और बेचारे चुनाव आयोग की फजीहत हुई। इसी फजीहत में एक फर्जी खबर ये भी थी कि अगर कोई वोट नहीं डालेगा तो चुनाव आयोग उनके बैंक खाते से 350 रूपये  काट लेगा बाद में चुनाव आयोग ने इस खबर पर भी सफाई दी,और खबर को फेक बताया।  यही नहीं पैसे लेने,पैसे देने से लेकर कई तरह की फर्जी खबरों से 2019लोकसभा इलेक्शन गुलजार रहा।

अब फिर से देश की राजधानी दिल्ली में चुनावी सरगर्मी जोरों पर हैं,तो फर्जी खबरों ने भी दस्तक दे दी है। जिसकी शुरूआत आम आदमी पार्टी के चुनावी उम्मीदवारों की एक लिस्ट से हो भी गयी है। जिसको जारी करके कहा गया था कि केजरीवाल ने इस बार लगभग सभी मुस्लिम उम्मीदवार ही चुने हैं।वो दिल्ली को पाकिस्तान बनने की कोशिश कर रहे हैं।हाँलाकि जब 14जनवरी को आम आदमी पार्टी ने अपने उम्मीदवारों की असली लिस्ट जारी की तो एक-दो नामों को छोड़ सभी नाम अलग थे। अब इस फर्जी खबर से किसको फायदा हुआ और किसकी फजीहत वो तो चुनाव आयोग भी नहीं बता सकता। इस इलेक्शन का ये आखिरी फर्जी खबर नहीं हो सकती,अभी चुनावी पर्व चल ही रहा है तो फर्जी खबरों के साथ फर्जी पोस्टरों का आना बदस्तूर जारी रहेगा।

ऐसा नहीं है कि इलेक्शन के बाद फर्जी खबरों में मंदी देखी गयी हो। इनका बाजार बदस्तूर तेजी के दौर में रहता है। बता दें कि हर बड़ी खबर को ढाँपनें में,किसी का नाम बड़ा बनाने में,या किसी का नाम खराब करने में ऐसी फर्जी खबरों की साल के  बारह महीने,तीन सौ पैंसठ दिन जरूरत रहती है। सबसे बड़ी बात ये है कि ये सारी खबरें राजनीति,सरकार,सरकार के फैंसलों,बयानों विपक्ष,विपक्ष के बयानों से ही जुड़ी होती हैं।

आमतौर पर खबरें सूचना,जानकारी,पड़ताल,या सामान्य ज्ञान से जुड़ी होती हैं जो हमारे जीवन को प्रभावित करती हैं। पर इन फर्जी खबरों के जरिये हम बुरी तरह से प्रभावित हो रहे हैं। हम गलत खबरों के जरिये गलत जानकारियां जुटा रहे हैं,और गलत जानकारियां शेयर कर रहें हैं।

इसका परिणाम ये है कि हम गलत सूचनायें  ले रहे हैं,गलत सूचनाओं का आदान-प्रदान कर रहे हैं और गलत फैंसले ले रहे हैं। जिनका तुरन्त असर भले ही हम पर ना दिखे पर एक दिन गंभीर परिणाम सामने आयेगें। फर्जी खबरें एक खास सोची समझी साजिश के तहत ही गढी या रची जाती हैं जिसका सियासी लाभ कोई सियासी विरादरी ले लेती है,पर इसका आम जनता के लाभ से कोई वास्ता नहीं है।

अदालतें सरकारें ऐसी फर्जी खबरों के खासा चलन पर चिन्ता जता चुकी है,हाल ही देश के राष्ट्रपति भी इस पर अपनी चिन्ता व्यक्त कर चुके हैं। ये एक गंभीर चिंन्ता का विषय है पर इसके लिये सरकारों को कड़े फैंसले लेने पड़ेगें। फिलहाल तब तक हमें भी खबरों और फर्जी खबरों में अंतर करने की कोशिश करनी चाहिये।

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