“विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, उच्च शैक्षणिक संस्थान के निदेशकों,कालेज के प्राचार्यों को नई शिक्षानीति के क्रियान्वयन की रूपरेखा पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संबोधित करेंगे”

Janardan Yadav

 

 

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रूपसंजना,दिल्ली

शिक्षामंत्री रमेश पोखरियाल “निशंक”,शिक्षा राज्यमंत्री संजय धोत्रे व नीति तैयार करने वाली कमेटी के अध्यक्ष कस्तूरीरंगन प्रधानमंत्री के सम्बोधन के अवसर पर उपस्थित रहेंगे। मानव संसाधन विकास मंत्रालय व विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के तत्वावधान में ये कोंक्लेव आयोजित किया जा रहा है।देश में 34 साल के बाद नई शिक्षा नीति आई है। इस पर पीएम मोदी का ये पहला संबोधन होगा।उच्च शिक्षा मे किए गए बदलावों के प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा होगी ।

नई शिक्षा नीति की प्रमुख बिन्दुओं पर चर्चा की संभावना है।

-नई शिक्षा नीति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा के साथ कृषि शिक्षा, कानूनी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा और तकनीकी शिक्षा जैसी व्यावसायिक शिक्षाओं को इसके दायरे में लाया गया है।

-पढ़ाई की रुपरेखा 5+3+3+4 के आधार पर तैयारी की जाएगी। इसमें अंतिम 4 वर्ष 9वीं से 12वीं शामिल हैं।

-सरकार ने वर्ष 2030 तक हर बच्चे के लिए शिक्षा सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा है। स्कूली शिक्षा के बाद हर बच्चे के पास कम से कम एक लाइफ स्किल होगी। इससे वो जिस क्षेत्र में काम शुरू करना चाहेगा तो कर सकेगा। सरकार ने लक्ष्य निर्धारित किया है कि GDP का 6फीसद शिक्षा में लगाया जाए, जो अभी 4.43% है।-नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश के लिए कॉमन एंट्रेंस एग्जाम का ऑफर दिया जाएगा। यह संस्थान के लिए अनिवार्य नहीं होगा।

– शिक्षा के क्षेत्र में पहली बार मल्टीपल एंट्री और एग्जिट सिस्टम को लागू किया गया है। एक साल के बाद सर्टिफिकेट, दो साल के बाद डिप्लोमा और तीन-चार साल के बाद डिग्री मिल जाएगी। इससे ऐसे छात्रों को बहुत फायदा होगा जिनकी किसी कारणवश पढ़ाई बीच में छूट जाती है।

 

 

 

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