“समुद्री दुश्मनों को करारा जवाब देने के लिए स्टील्थ सबमरीन परियोजना को हरी झंडी दी भारत सरकार”

Janardan Yadav

डॉ. जनार्दन यादव,दिल्ली

समुद्री रक्षा कवच मजबूत करने की दृष्टि से जहां चीन और पाक से बढ़ते ख़तरे दिन-प-दिन गहरा होता जा रहा है।भारत सरकार ने इसे ध्यान में रखते हुए 42 हज़ार करोड़ रुपये की लागत वाली स्टील्थ सबमरीन बनाने की परियोजना का रास्ता साफ कर दिया है।छह पनडुब्बियां बनाई जाएगी।p-75I के तहत भारतीय नौसेना को पहली पनडुब्बी साल 2022 में मिलेगी।

स्टील्थ सबमरीन पनडुब्बियां न्यूक्लियर रिएक्टर के कारण पानी के अंदर तेज रफ़्तार से लंबी दूरी तक अभियानों में अंजाम देने में मददमिलती है।पानी के अंदर युद्ध के हथियारों की भारी कमी हो रही है।अभी नौसेना के पास सिर्फ दो स्कॉर्पियन और 13 पुरानी पीढ़ी के डीजल इलेक्ट्रिक सबमरीन है जिन्हें 20 साल पहले बेड़े में शामिल किया गया था।परमाणु क्षमता से लैस कवक दो पनडुब्बियां ही भारतीय नौसेना के पास है।

चीन के पास इस समय 50 डीजल इलेक्ट्रिक और 10 न्यूक्लियर सबमरीन है।पाकिस्तान के पास 5 पनडुब्बियां है।अब भारत ची  व पाकिस्तान से समुद्री क्षेत्र में इनसे दो दो हाथ करने में सक्षम हो जाएगा।

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