कोरोना वायरस के लिए हो रही वैक्सीन बनाने की कोशिश:-डॉ. राघवन

Ashu Yadav

प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉ. के. विजय राघवन ने बताया है कि देश में वैक्सीन बनाने की प्रक्रिया जोरों पर है और देश में 30 ग्रुप हैं जो कोरोना वायरस के खिलाफ वैक्सीन बनाने की कोशिश कर रहे हैं और यह बहुत रिस्की प्रॉसेस है.

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कोरोना वायरस के लिए वैक्सीन बनाने की कोशिश

कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में भारत को बड़ी कामयाबी मिली है और आज प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉ. के. विजय राघवन ने बताया है कि देश में वैक्सीन बनाने की प्रक्रिया जोरों पर है और देश में 30 ग्रुप हैं जो कोरोना वायरस के खिलाफ वैक्सीन बनाने की कोशिश कर रहे हैं और यह बहुत रिस्की प्रॉसेस है.

वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. के. विजय राघवन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में वैक्सीन बनाने के चार तरीकों के बारे में भी जानकारी दी जिनसे दुनियाभर में वैक्सीन तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है-पहला तरीका है, एमआरएनए वैक्सीन- इसमें वायरस के जैनेटिक मटीरयल लेकर उसी को इंजेक्ट कर लते हैं.हमारा शरीर उसे ट्रांसलेट करके वायरल प्रोटीन बनाता है और फिर जब वायरस शरीर में प्रवेश करता है तो इम्यून रिस्पांस तैयार होता है,दूसरा तरीका है-स्टैंडर्ड वैक्सीन- इसमें वायरस का कमजोर वर्जन लेते हैं. हमारे यहां रोटावैक वैक्सीन आया था, वो रोटावैक स्ट्रेन से बनाया गया था,तीसरी पद्धति में किसी और वायरस के बैकबोन में इस वायरस के प्रोटीन कोडिंग रीजन को लगाकर वैक्सीन बनाते हैं और चौथे तरीके में वायरस का प्रोटीन लैब में बनाकर दूसरे स्टिमूलस के साथ लगाते हैं’.

उन्होंने कहा कि वैक्सीन बनाने में आम तौर पर 10 से 15 साल लग जाते हैं और इसकी लागत में 20 करोड़ से 30 करोड़ डॉलर तक आती है लेकिन हमारी कोशिश है कि एक साल में वैक्सीन डिवेलप कर दें.

कोरोना वायरस को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस में नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने कहा कि कोरोना वायरस के खिलाफ जो विश्व की लड़ाई है उसमें जो लड़ाई जीती जाएगी वो विज्ञान और तकनीक के माध्यम से जीती जाएगी और वैक्सीन से जीती जाएगी.डॉ. पॉल ने कहा कि भारत की फार्मा इंडस्ट्री को फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड कहा जाता है और यह पर बनी दवाइयां पूरी दुनिया में जाती हैं. डॉ. पॉल ने कहा कि पीएम की अपील पर हम आरऐंडडी करते हुए नई इजाद करने में जुटे हुए हैं.

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