अमेरिका में उपद्रवियों द्वारा महात्मा गांधी की मूर्ती को क्षति पहुंचाने पर अमेरिकी प्रशासन ने मांगी माफी

Sushmit Sinha

अमेरिका में पिछले कुछ दिनों से एक अश्वेत अमेरिकी जार्ज फ्लॉयड की पुलिस द्वारा हत्या किए जाने पर हिंसक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। अमेरिका के करीब 40 से अधिक शहरों में प्रदर्शन की आग लगी हुई है। दंगाई और प्रदर्शनकारी उपद्रव कर रहे हैं और आगजनी, लूटपाट जैसी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं।

इसी बीच कुछ शरारती तत्वों ने वाशिंगटन डीसी में महात्मा गांधी की प्रतिमा तोड़ दी।

16 सितंबर 2000 को एक अमेरिका यात्रा के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई ने अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन को यह स्मारक समर्पित किया था।

अमेरिकी राजदूत केन जस्टर ने भारत से महात्मा गांधी की प्रतिमा को क्षति पहुंचने के बाद माफी मांगी है।

केन जस्टर ने ट्वीट करते हुए कहा “वाशिंगटन, डीसी में गांधी की प्रतिमा को क्षति पहुंचना काफी शर्मनाक है। हम इसके लिए दिल से माफी मांगते हैं। यह सब कुछ जार्ज फ्लॉयड की दुखद मौत से भड़के प्रदर्शनकारियों ने किया। हम इस प्रकार के भेद-भाव के खिलाफ हैं हम सब एक हैं। अमेरिका में हालात जल्द ठीक होंगे।”

यह घटना 2 और 3 जून की रात को हुई थी जिसके बाद भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने स्टेट डिपार्टमेंट को सूचित किया और लोकल लॉ एनफोर्समेंट एजेंसी के साथ शिकायत दर्ज की। बुधवार को मेट्रोपॉलिटन पुलिस के अधिकारियों की एक टीम घटनास्थल पर पहुंची और वहां का जायजा लिया।

अमेरिका में प्रदर्शन की आग दिन प्रतिदिन और फैलती जा रही है। इनमें से कुछ विरोध प्रदर्शन इतने हिंसक हो गए जिसके वजह से अमेरिका के कई प्रतिष्ठित स्मारकों को भी नुकसान पहुंचा। इस सप्ताह, प्रदर्शनकारियों ने वॉशिंगटन में एक चर्च को जला दिया और राष्ट्रीय स्मारक और लिंकन मेमोरियल जैसे ऐतिहासिक स्थानों को नुकसान पहुंचाया।

अक्टूबर 1998 में, अमेरिकी कांग्रेस ने भारत को कोलंबिया के जिले में फेडरल लैंड पर महात्मा गांधी के सम्मान में इस स्मारक की स्थापना के लिए और रख-रखाव के लिए मंजूरी दी थी। भारतीय दूतावास के वेबसाइट के अनुसार यह मूर्ति कांस्य धातु की बनी है जिसकी ऊंचाई 8 फीट 8 इंच है।

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