दिल्ली विधानसभा चुनाव: आर.के.पुरम में दिलचस्प है मुकाबला

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दिल्ली विधानसभा चुनाव में सभी पार्टियों ने अपना पूरा जोर लगा दिया है। मुख्य मुकाबला हर बार की तरफ बीजेपी-कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच है। एक तरफ बीजेपी ने अपनै हैवीवेट नेताओं को चुनाव प्रचार में उतार दिया है, तो आम आदमी पार्टी पिछले पांच साल की तरह चुनावी मोड़ में है। हालांकि इस बार कांग्रेस देर से ही सही, लड़ाई में आती और मुकाबले को दिलचस्प बनाती दिख रही है। कुछ ऐसा ही हाल आर.के.पुरम विधानसभा क्षेत्र का है।

 

कुल कितने मतदाता ?

आर के पुरम विधानसभा सीट पर डेढ़ लाख से अधिक मतदाता हैं, जिसमें प्रवासियों की संख्या ज्यादा है। यही नहीं, इस विधानसभा सीट पर सरकारी नौकरी करने वालों की संख्या भी काफी है। तो तीन गांवों की वजह से ग्रामीण मतदाता भी इन विधानसभा क्षेत्र में हैं, जो चुनावों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं।

कैसा है मुकाबला ?

प्रत्याशियों की बात करें को बीजेपी ने यहां से पिछला चुनाव हार चुके अनिल शर्मा पर ही दांव खेला है। तो कांग्रेस ने नए चेहरे प्रियंका सिंह को मैदान में उतारा है। प्रियंका सिंह महिला कांग्रेस की उपाध्यक्ष हैं और महिलाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर लगातार सक्रिय रही हैं। वहीं, आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी की बात करें तो आर.के.पुरम विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी ने अपने सबसे अमीर प्रत्याशियों में से एक प्रमिका टोकस को फिर से टिकट दिया है। उनपर पिछले चुनाव के बाद से ही जनता के बीच से गायब रहने का आरोप लगता रहता है। यही नहीं, प्रमिला के कम पढ़े लिखे होने की वजह से भी उनपर उंगलियां उठती रही हैं, क्योंकि विधायक के तौर पर उनक पति ही सारा कामकाज देखते हैं। चूंकि वो पहले बीएसपी से चुनावी मैदान में रहे हैं, ऐसे में उनपर पैसों के बंदरबांट का भी आरोप लगता है।

 

क्या कहते हैं मतदाता ?

आर. के. पुरम विधानसभा सीट अक्सर बदलाव के लिए जानी जाती है। पिछले तीन चुनावों में अलग अलग पार्टी के प्रत्याशियों ने बाजी मारी थी। इस बार लोग बदलाव की बात कह रहे हैं। आर.के.पुरम सेक्टर तीन में रहने वाले सौरभ शर्मा उत्तर प्रदेश से हैं, लेकिन उनका परिवार यहां 10 सालों से रह रहा है। उन्होंने दावा किया कि आर.के.पुरम की जनता इस बार बदलाव के लिए वोट करेगी। वहीं, राहुल श्रीवास्तव का कहना है कि वो कांग्रेस की वापसी चाहते हैं, क्योंकि केंद्र और राज्य की बीजेपी-आप सरकारों ने सिवाल हल्ला काटने के और कोई काम नहीं किया। उन्होंने दावा किया कि अरविंद केजरीवाल शिक्षा, स्वास्थ्य की सेहत सुधारने का जो दावा करते हैं, वो झूठा है। यहां के स्कूलों में टाइल्स जरूर लगी हैं, लेकिन शिक्षा का स्तर गिरा है। उन्होंने दावा किया कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा को लेकर राज्य सरकार गंभीर अपराध कर रही है, क्योंकि सरकार ने ऐसे निर्देश जारी किए हैं कि सिर्फ मजबूत बच्चों को ही बोर्ड की परीक्षा में बैठने दिया जाए। बाकी बच्चों को फेल करके स्कूलों से निकाला जा रहा है।

 

स्वास्थ्य के मुद्दे पर भी फेल है सरकार !

दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार ने शिक्षा के बाद स्वास्थ्य को लेकर बड़े दावे किए हैं, लेकिन आम लोगों का मानना है कि सरकार इस मामले में भी झूठा दावा कर रही है। मोहल्ला क्लीनिकों की हालत खराब है और इसका फायदा सिर्फ पार्टी के कार्यकर्ता उठा रहे हैं। और आम लोग महंगे अस्पतालों में लुटने को विवश हैं।

पिछले चुनाव के विजेता

2015- प्रमिला टोकस-आम आदमी पार्टी

2013- अनिल शर्मा(कुल 10 महीने)-बीजेपी

2008- बरखा शुक्ला सिंह-कांग्रेस

2003- बरखा शुक्ला सिंह-कांग्रेस

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