बड़ा खुलासा: #CAA #NRC के खिलाफ इंटरनेशनल साजिश? प्रदर्शन के दौरान हिंसा में शामिल पीएफआई के आतंकियों से संबंध ! Exclusive

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नई दिल्ली। भारत सरकार के नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ पूरे देश में जोरदार प्रदर्शन हो रहे हैं, जिसमें बड़ी संख्या में हिंसा की खबरें भी आ रही हैं। अकेले यूपी के कई शहरों में हुई हिंसा में 20 लोगों की जान जा चुकी है। अब इस मामले में ePatrakaar.com आपके सामने उस माड्यूल का खुलासा कर रहा है, जिसमें हिंसा में आतंकी कनेक्शन के साथ ही इंटरनेशनल साजिश की बू भी आ रही है। जी हां, #CAA #NRC के खिलाफ हिंसा के दौरान जिस एक संगठन का नाम सबसे ज्यादा आ रहा है, उसका नाम है पॉप्युलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई)। इस संगठन के कारनामों को देखते हुए अब सरकार इसके खिलाफ बेहद कड़े कदम उठाने की तैयारी में है, जिसमें इसपर बैन लगाया जा सकता है।

 

क्यों लग सकता है बैन?

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पीएफआई की कुंडली मंगा ली है, तो यूपी सरकार अब इसपर बैन लगाने की तैयारी में है। दरअसल, नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ जिन जगहों पर प्रदर्शन हिंसक हो गए, वहां पीएफआई की कथित संलिप्तता पाई गई। इसका मुख्य कार्यालय दिल्ली के ओखला में है, जहां सीएए के खिलाफ सबसे ज्यादा हिंसक प्रदर्शन हुआ था। प्रदर्शन तो जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्र कर रहे थे, लेकिन उसमें राजनीतिक कार्यकर्ताओं के शामिल हो जाने से प्रदर्शन बेहद हिंसक हो चला था। यही नहीं, यूपी के साथ ही पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, केरल, दिल्ली, महाराष्ट्र जैसे राज्यों में हुए हिंसक प्रदर्शनों में भी इस संगठन का नाम आया है।

 

पीएफआई क्या है?

पीएफआई एक गैर सरकारी संगठन है, जो अल्पसंख्यकों की राजनीति की माहिर मानी जाती है। हालांकि इसके एजेंडे में दलित और वंचित वर्ग भी शामिल हैं। ये संगठन 2006 में कई संगठनों के विलय के बाद अस्तित्व में आया, जिनपर आतंकी घटनाओं, राजनीतिक हत्याओं में शामिल होने के आरोप हैं।

 

पीएफआई पर क्या हैं आरोप?

पीएफआई के अध्यक्ष ई अबुबकर प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन सिमी के भी अध्यक्ष रहे हैं। पीएफआई को सुरक्षा एजेंसियां सिमी का मुखौटा मानती हैं। पीएफआई में सिमी के कई पदाधिकारी उच्च पदों पर हैं। यही नहीं, केरल और कर्नाटक सरकार इन संगठनों पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश भी कर चुकी है, जिसमें वो असफल रहे। पीएफआई के शिविरों, शस्त्र प्रशिक्षण कार्यक्रम पर छापेमारी में भारी संख्या में हथियार भी बरामद हो चुके हैं। यही नहीं, कुछ साल पहले दक्षिण भारत में देश के उत्तर-पूर्वी राज्यों से आने वालों के खिलाफ अभियान में भी पीएफआई का हाथ पाया गया है। वहीं, जांच एजेंसियों का दावा है कि पीएफआई को आईएसआई से भी आर्थिक मदद मिलती है, ताकि वो देश में अस्थिरता को बढ़ा सके। यही नहीं, उसके कई आतंकी संगठनों से भी संबंध होने की आशंका जताई जा रही है। इसी बीच यूपी सरकार ने दावा किया है कि हिंसा फैलाने वालों में शामिल रहे पीएफआई के 25 कार्यकर्ताओं को अबतक हिरासत में लिया जा चुका है।

 

पीएफआई का क्या है दावा?

 

पीएफआई का दावा है कि उसे बदनाम करने की कोशिश की जा रही हैं। पहले भी संगठन का नाम गलत चीजों से जोड़ा गया था, जिसपर सरकारों को मुंह की खानी पड़ी थी।

सरकारी एजेंसियों ने क्या आरोप लगाए हैं?

पॉप्युलर फ्रंट ऑफ इंडिया के खिलाफ एनआईए, एसआईटी जांच हो रही है। जिसकी 6 पन्नों की रिपोर्ट में पीएफआई को देख की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा बताया गया है। इसी रिपोर्ट के आधार पर अब केंद्रीय गृह मंत्रालय पीएफआई के खिलाफ बैन लगाने की कार्रवाई में जुट गई है।

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