संसद में सरकार का कबूलनामा, करीब 18 फीसदी पदों पर नहीं हुई कोई भर्ती

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नई दिल्ली। हिंदुस्तान में बहस के मुद्दे कई हैं। बेरोजगारी पर बात हर कोई करता है, लेकिन इस मुद्दे पर जोरदार आवाज कोई नहीं उठाता। करीब 6 साल से सत्ता में एनडीए की सरकार है, और उससे पहले 10 सालों तक यूपीए की सरकार रही। लेकिन हैरानी की बात है कि केंद्र सरकार की ओर से कुल स्वीकृत नौकरियों में से करीब साढ़े 6 लाख पद खाली हैं और कोई भी सरकार इन पदों को भरने के लिए गंभीर नहीं दिखी।

 

इस संसद सत्र में दोनों सदनों में हजारों सवाल पूछे गए, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण सवाल पूछा बीजेपी सांसद शारदाबेन पटेल ने। उन्होंने सरकार से पूछा कि देश में केंद्र सरकार की ओर से कितने पद रोजगार के लिए स्वीकृत है। यानि सरकारी नौकरियों की कितनी संख्या सरकार की तरफ से तय की गई हैं और उनमें से कितने पद भरे गए हैं।

 

इस सवाल का जवाब सरकार की तरफ से आया है, जो बेहद चौंकाने वाला है। केंद्र सरकार ने माना कि केंद्र में कुल स्वीकृत 38.02 लाख पदों में से करीब 6.83 लाख पद खाली हैं। यानी कुल पदों में से 18 फीसदी पद खाली हैं, जबकि देश के नौजवान रोजगार के लिए दर-दर भटक रहे हैं।

एक्सक्लूसिव: चरम पर बेरोजगारी, किसी राज्य में शून्य तो कहीं 216 लोगों को मिली नौकरी

सरकार ये पद क्यों नहीं भर रही, उसकी तरफ से कोई ठोस जवाब तो नहीं आया। लेकिन इस मुद्दे पर देश के नौजवानों की निष्क्रियता भी चौंकाने वाली है। वो छोटे मोटे मोर्चे निकाल लेते हैं और अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेते हैं। हां, लेकिन उसी समय वो नेताओं की रैलियों में जरूर पहुंचते हैं। उन रैलियों में, जिनके दम पर ये नेता सत्ता पर काबिज होते हैं और युवाओं का दोहन करते हैं। जबकि बेरोजगारी से लड़ाई की दिशा में कोई भी सकारात्मक कदम नहीं उठाता। ये नेता हर दल में हैं और हर सरकार में है। शायद यही देश इस देश के युवाओं का हासिल है- बेरोजगारी, अशिक्षा, अपराध और बेफिक्री।

कितनी नौकरियां किस राज्य में दी गई, उसे इस चार्ट के माध्यम से जाना जा सकता है।

 

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