भारत मे नोटबंदी का इतिहास|

Aashukesh Tiwari

1987 में 500 के नोट को पेश किया गया जिसके बाद 1996 में जारी किए गए नोटों की महात्मा गांधी श्रृंखला 10 रुपये और 500 रुपये के नोटों से शुरू हुई|
2016 के वक्त देश की 86% से ज़्यादा आबादी के पास 500 और 1000 के नोट थे।
नोटबंदी के अंत में यह बताया गया कि 99.3% पैसे बैंकों में वापस आ चुके हैं।

भारत मे नोटबंदी का इतिहास|

आप सबको पता होगा कि 8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1000 और 500 के नोट बंद कर दिए। लेकिन शायद आप सब को यह नहीं पता होगा कि 2016 के पहले भी हमारे देश में दो बार नोटबंदी हो चुकी है, तो चलिए जानते हैं कि पहली और दूसरी नोटबंदी कब हुई, किसके सरकार में हुई और क्या उतार-चढ़ाव देखने को मिले। 18 वीं शताब्दी में पेपर मनी को लीगल किया गया था और भारत में सबसे पहले 10 20 50 और 100 के नोट महारानी विक्टोरिया के तस्वीर के साथ छापे गए थे। 1 अप्रैल 1935 को आरबीआई का गठन हुआ और 1938 में 1000, 5000 और 10000 के नोट अंग्रेज़ी सरकार ने पेश किया। जिसके कुछ सालों बाद ठीक 1946 में सबसे पहला नोट बंदी अंग्रेज़ी सरकार द्वारा किया गया जिसमें हजार 5000 और 10000 के नोटों को बंद कर दिया गया।

भारत की आजादी के बाद 1954 में 1000 5000 और 10000 के नोटों को वापस लाया गया। जिसके बाद 1977 में जनता पार्टी की सरकार सत्ता में आई और उस वक्त के प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई द्वारा हाई डिनॉमिनेशन बैंक नोट एक्ट 1978 में लाया गया जिसके बाद काले धन का हवाला देते हुए 17 जनवरी 1978 को 1000 5000 और 10000 के नोट को बंद कर दिया गया। उस वक्त के आरबीआई गवर्नर आई जी पटेल ने नोटबंदी का विरोध करते हुए कहा था कि “ब्लैक मनी हटाने के लिए नहीं बल्कि विपक्ष के पावर और फंडिंग को कम करने के लिए नोट बंदी किया जा रहा है” उस समय लोगों को 1 हफ्ते का वक्त दिया गया ताकि वह अपने‌ 1000 5000 10000 के नोटों को बैंकों में जमा करवा सके, आपको बता दें कि 1978 में 1000 5000 और 10000 के नोटों को बहुत बड़ा माना जाता था जिसके कारण भारत की पूरी आबादी में से सिर्फ़ 10% आबादी के पास‌ ही 1000 5000 और 10000 के नोट थे। 1978 के नोट बंदी के खत्म होने तक 75% नोट बैंकों में जमा कर दिए गए थे। ‌ हालांकि इस नोट बंदी से देश की आर्थिक स्थिति पर कोई चोट नहीं पहुँची थी। इसलिए इस नोट बंदी को लेकर ज़्यादा सवाल नहीं उठाए गए। वहीं 1987 में 500 के नोट को पेश किया गया जिसके बाद 1996 में जारी किए गए नोटों की महात्मा गांधी श्रृंखला, 10 रुपये और 500 रुपये के नोटों से शुरू हुई। इस शृंखला ने लायन कैपिटल शृंखला के सभी नोटों को बदल दिया। 1978 में लगे बंद के बाद सन 2000 में 1000 के नोट को दोबारा चालू किया गया।

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अब हम बात करते हैं 2016 की नोट बंदी की, 8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी काले धन का हवाला देते हुए 1000 और 500 के नोट बंद कर दिए। 2016 के वक्त देश की 86% से ज़्यादा आबादी के पास 500 और 1000 के नोट थे। नोटबंदी की शुरुआत में सरकार का यह कहना था कि देश से काले धन का खात्मा हो जाएगा। घोषणा के बाद वाले दिन यानी 9 नवंबर से ही लोग नोटों को बदलवाने में लग गए आपको बता दें कि सोने की खरीदारी में काफ़ी ज़्यादा वृद्धि देखी गई बताया जाता है कि 8 और 9 नवंबर को 15 टन से अधिक सोने की बिक्री हुई यही नहीं पेट्रोल की बिक्री में भी 50% का इजाफा हुआ। नोटबंदी के दौरान भारत की आधी आबादी से ज़्यादा लोग बैंकों और एटीएम के लाइन में घंटों खड़े रहें इसमें कई लोगों की जान भी चली गई। नोटबंदी के अंत में यह बताया गया कि 99.3% पैसे बैंकों में वापस आ चुके हैं। मतलब जिस काम से नोटबंदी लाई गई थी वह काम नाकाम हो गया। नोट बंदी का असर हमारे देश पर ऐसा पड़ा कि उस समय हमारी जीडीपी 1% नीचे गिर गई जिसका परिणाम यह हुआ कि हमारे देश को 1.5 लाख करोड़ का नुकसान हुआ। यह थी हमारे देश में हुई नोटबंदी से जुड़ी हुई कुछ महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ

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