प्रशांत किशोर के आई-पैक की बदमाशी, कैंपेनिंग में लगे वालंटियर्स को बिना पैसे दिए काम से हटाया!

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नई दिल्ली से ई पत्रकार- श्रवण शुक्ला। इलेक्शन मैनेजमेंट के बड़े नामों में से एक और लगातार चर्चा में बने रहने वाले प्रशांत किशोर एक निगेटिव वजह से चर्चा में हैं। वजह है, दिल्ली विधानसभा चुनाव में काम कर रही उनकी संस्था, जिसने आम आदमी पार्टी के साथ काम करने रिसर्चर्स के साथ ही अपने उन फेलो और वालंटियर्स को काम से हटा दिया है, जो आई-पैक की तरफ से आम आदमी पार्टी का काम कर रहे थे।

ये सभी लोग दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के लिए रिसर्च समेत इलेक्शन कैंपेनिंग का काम देख रहे थे, लेकिन आई-पैक के आने के बाद सभी को काम से हटा दिया गया है। यही नहीं, इन सभी लोगों को वादे के मुताबिक तय रकम भी नहीं दी गई। ऐसे लोगों में अधिकतर युवा लोग हैं, जो देश के अलग अलग हिस्सों से दिल्ली में रहते हैं और जेब खर्च जैसी जरूरतों को पूरा करने के लिए आम आदमी पार्टी से जुड़कर पार्ट टाइम काम कर रहे थे।

इस बात का खुलासा आम आदमी पार्टी के ही वॉट्सऐप ग्रुप में उस समय हुआ, जब काम से हटाई गई एक फेलो का दर्द छलक गया। नाम न छापने की शर्त पर वालंटियर ने बताया कि वो आम आदमी पार्टी के लिए रिसर्च का काम करती थी, लेकिन आई पैक आने के बाद उन सभी को बिना बताए और बिना भुगतान के काम से हटा दिया गया। इनमें से कुछ युवा ऐसे भी हैं, जो देश के अलग अलग हिस्सों से काम करने के लिए दिल्ली में आए हुए हैं और अपने खर्चों पर दिल्ली में रहकर पार्टी का काम कर रहे हैं।

इन युवाओं का कहना है कि आई पैक की वजह से आम आदमी पार्टी ने जो कदम उठाया, वो गलत है। कम से कम उन्होंने जितने दिनों तक काम किया है, उसका भुगतान करना चाहिए था। इनमे से कुछ युवा ऐसे भी हैं, जिनके पास अपने अपने घरों की ओर लौटने के लिए भी पैसे नहीं हैं और वो दिल्ली के अलग अलग हिस्सों में फंस गए हैं।

जिस युवा महिला का दर्द आम आदमी पार्टी के ही ग्रुप में छलका, वो खुद बाहर से आई हुई हैं। हालांकि इस दौरान उन्होंने चिंता जताई कि ये बात बाहर जाने पर पार्टी की बदनामी हो सकती है। लेकिन मजबूर होकर वो पार्टी के ग्रुप में मदद की गुहार लगा रही हैं।

नीचे देखिए, बातचीत का स्क्रीनशॉट। उक्त युवा फेलो की पहचान छिपाने के लिए उसके नंबर को मिटा दिया गया है।

 

आई पैक अब आम आदमी पार्टी के वालंटियर्स से काम करा रही है, जिन्हें पैसे नहीं देने पड़ रहे। आई पैक ने जिन फेलो और वालंटियर्स को हटाया है, उनकी भर्ती उसने फेसबुक पर विज्ञापन देकर की थी और हर दिन के हिसाब से 500 रुपए बतौर मेहनताना देना तय किया था। इस तरह से इन फेलो को 15 हजार रुपए मिला करते थे। लेकिन अब न तो आई पैक इनसे काम करा रही है और न ही पैसे दे रही है।

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