दिल्ली मेरठ सेमी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर का ठेका चीनी कंपनी को मिलने पर विपक्ष का बवाल

Ashu Yadav

केंद्र सरकार की तरफ से बनने वाले दिल्ली-मेरठ सेमी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर का ठेका एक चीनी कंपनी को मिलने जा रहा है. इस पर कांग्रेस ने सरकार पर हमला बोला है. स्वदेशी जागरण मंच ने भी मांग की है कि यह बोली तत्काल रद्द की जाए. दिल्ली-मेरठ ​रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) प्रोजेक्ट के अंडरग्राउंड स्ट्रेच बनाने के लिए सबसे रकम की बोली एक चीनी कंपनी ने लगाई है.

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चीनी कंपनी ने लगाई सबसे कम रकम की बोली

चीन सीमा पर भले ही तनाव हो और भारत देश में चीनी माल के बहिष्कार का स्वदेशी आंदोलन जोरों पर हो,लेकिन चीनी कंपनियों का प्रभुत्व अब भी कम नहीं हो हुआ हैं और इसी बीच केंद्र सरकार की तरफ से बनने वाले दिल्ली-मेरठ सेमी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर का ठेका एक चीनी कंपनी को मिलने जा रहा है,जिस पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है और स्वदेशी जागरण मंच ने भी मांग की है कि यह बोली तत्काल रद्द की जाए.

क्या है पूरा मामला

दिल्ली-मेरठ ​रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) प्रोजेक्ट के अंडरग्राउंड स्ट्रेच बनाने के लिए सबसे रकम की बोली लगाने वाली शंघाई टनल इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड (STEC) एक चीनी कंपनी है.ऐसे समय में जब देश में चीन के बीच तनाव का माहौल है और चीनी माल के बहिष्कार की बातें की जा रही हैं और इसी बीच करीब 1100 करोड़ रुपये का यह ठेका चीनी कंपनी को मिलने पर विपक्ष ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है.

स्वदेशी जागरण मंच ने क्या कहा

बीजेपी के मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े स्वदेशी जागरण मंच (SJM) ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस बोली को रद्द करने की मांग की है. इसी केसाथ स्वदेशी जागरण मंच ने केंद्र सरकार से मांग की है कि इस दिल्ली-मेरठ सेमी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के ठेके को रद्द करते हुए,इस ठेके को किसी भारतीय कंपनी को दिया जाए. स्वदेशी जागरण मंच ने कहा है कि यदि केंद्र सरकार को आत्मनिर्भर भारत अभियान को सफल बनाना है तो ऐसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं में किसी भी चीनी कंपनियों को शामिल होने का अधिकार ही नहीं देना चाहिए.

स्वेदशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह-संयोजक अश्वनी महाजन ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मांग की है कि इस ठेके को तत्काल रद्द किया जाए. स्वेदशी जागरण मंच (SJM) यह चाहता है कि महत्वपूर्ण परियोजनाओं में बोली लगाने का अवसर सिर्फ भारतीय कंपनियों कोमिले और स्वेदशी जागरण मंच ने अपनी इस बात को मंत्रालय तक पहुंचा दिया है.

इन दिनों लद्दाख में भारत-चीन के बीच तनाव चरम पर है और ऐसे में चीनी कंपनी को ठेका मिलने से कई लोग सवाल उठा रहे हैं.

ये कंपनियां हुईं थी बोली में शामिल

12 जून को हुई बिडिंग में चीन की शंघाई टनल इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड कंपनी सबसे कम रकम की बोली लगाने वाली कंपनी बनी है,इसके तहत दिल्ली-मेरठ (RRTS) कॉरिडोर में न्यू अशोक नगर से साहिबाबाद के बीच 5.6 किमी तक अंडरग्राउंड सेक्शन का निर्माण होना है. इस पूरे प्रोजेक्ट का प्रबंधन नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) द्वारा किया जा रहा है. इस बोली में पांच कंपनियों ने बोली लगाई थी,जिसमें- चीनी कंपनी (STEC) ने 1,126 करोड़ रुपये की सबसे कम रकम की बोली लगाई, भारतीय कंपनी लार्सन ऐंड टूब्रो (L&T) ने 1,170 करोड़ रुपये की बोली लगाई, एक और भारतीय कंपनी टाटा प्रोजेक्ट्स और एसकेईसी के जेवी ने 1,346 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी.

कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कई ट्वीट करके इस मसले पर केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला है.

सड़क परिवहन मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि यह बोली पूरी तरह से समुचित प्रक्रिया के तहत लगाई गई और भारतीय कंपनियों को बराबर का मौका दिया गया था.

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