अमरीका:-कान्ट ब्रीथ (मैं सांस नहीं ले सकता)

मिनियापोलिस में जॉर्ज फ्लॉयड को एक दुकान में नकली बिल का इस्तेमाल करने के संदेह में गिरफ्तार किया गया था।
पुलिस के मुताबिक, जॉर्ज पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने 20 डॉलर (करीब 1500 रुपये) के फर्जी नोट के जरिए एक दुकान से कुछ खरीदारी की कोशिश की।

अमरीका:-कैंट ब्रेथ (मैं सांस नहीं ले सकता)

वो बोलता रहा मैं सास नहीं ले पा रहा हूँ, कसी ने नहीं सुना, उसे मार दिया गया, उन्हें हमेशा से मारा जाता रहा है। सब बोलते है कि अब नहीं और नहीं पर फिर भी मारे जाते है वो। नजाने और क्या-क्या देखने को मिलेगा। मैं बात कर रहा हूँ जॉर्ज फ्लोयड की जिसे बिच सड़क पर मार दिया गया। आखिर आप कैसे लड़ेंगे, एक महामारी से जिसे सरकार आंकने, समझने, बताने और उससे सुरक्षा करने में नाकाम रही इसी नाकामी ने अर्थव्यवस्था को नाकाम कर दिया न काम है, न पैसा है इन सब के बीच उसे बिच सड़क पर गला दबाकर मार दिया जाता है। अब हम लोकतंत्र की परिभाषा बदल रहे है? आपको नहीं लगता पूरी दुनिया बदल रही है। 46 साल के अश्वेत नागरिक जॉर्ज फ्लॉयड अफ्रीकी अमेरिकी समुदाय के थे। वह नॉर्थ कैरोलिना में पैदा हुए थे और टेक्सास के ह्यूस्टन में रहते थे, काम खोजने के लिए वह मिनियापोलिस आये थे और वहाँ -वह एक रेस्त्रां में सुरक्षा गार्ड का काम करते थे।

मिनियापोलिस में जॉर्ज फ्लॉयड को एक दुकान में नकली बिल का इस्तेमाल करने के संदेह में गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के मुताबिक, जॉर्ज पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने 20 डॉलर (करीब 1500 रुपये) के फर्जी नोट के जरिए एक दुकान से कुछ खरीदारी की कोशिश की। इसके बाद एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें पुलिस अधिकारी को घुटने से आठ मिनट तक जॉर्ज फ्लॉयड की गर्दन दबाते हुए देखा गया। वीडियो में जॉर्ज कहते हुए सुना जा सकता है कि मैं सांस नहीं ले सकता (आई कांट ब्रीद) । बाद में फ्लॉयड की चोटों के कारण मौत हो गई। जॉर्ज की मौत के बाद पूरे अमेरिका में हिंसक और अहिंसक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, जिसमें पांच लोगों की मौत हो गई और चार हजार से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हुई है और अरबों डॉलर की संपत्ति को नुकसान भी पहुंचा है। यहां तक कि व्हाइट हाउस के बाहर भारी विरोध प्रदर्शन के कारण राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप को बंकर में जाना पड़ा। जॉर्ज फ्लॉयड अमेरिका में न्‍याय और बराबरी मांग के प्रतीक बन गए हैं।

हमेसा से ही अमरीका में अश्वेत लोगों के प्रति अत्याचार देखा जाता रहा है। द गार्डियन ने लिखा है कि अश्वेत अमेरिकियों में गंभीर बीमारी की उच्च दर है, जिसमें शिशु मृत्यु दर के चौंकाने वाले आकड़े शामिल हैं। एक अश्वेत घराने की औसत धन-संपत्ति केवल एक श्वेत गृहस्थी है। मिनियापोलिस में, जहाँ विरोध शुरू हुआ, वहाँ पर सामन्य स्वेत परिवार की आय अश्वेत परिवार की आय से दोगुनी है। बताया जाता है कि हर एक हजार अश्वेत पुरुषों में से एक को अपने जीवनकाल के दौरान पुलिस द्वारा मारे जाने का डर रहता है। इस आधार रेखा को देखते हुए, यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि आज की समस्याओं का अश्वेत अमेरिकियों पर भी बहुत अधिक प्रभाव है। अश्वेत अमेरिकी श्वेत अमेरिकियों की दर से लगभग तीन गुना अधिक कोरोनोवायरस से मर रहे हैं। इसमें भी कोई दो राय नहीं होगा की अमेरिका में अश्वेतों को आगे भी पीछे रखा जायेगा। जातिवाद हमेशा से पूरे विश्व को खाता आया है और खाता रहेगा।

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