श्रमिक स्पेशल ट्रेन का सच, परेशान हुए मजदूर

Aashukesh Tiwari

सामान्य दिनों में रेलवे रोजाना लगभग 6000 ट्रेनें चलती है जिसमें 2.50 से 3 करोड़ यात्री सफ़र करते है और अभी रोजाना लगभग 200 ट्रेनें चलाई जा रही है तो यह कहना ग़लत होगा कि ज़्यादा ट्रैफिक होने के कारण ट्रेनें अपने गंतव्य स्टेशन से भटक रही हैं।

केंद्र सरकार लोगों के लिए क्या-क्या कर रही है उसे बताने में जोरों शोर से लगी है। रेल मंत्री अपनी उपलब्धियों को बताते नहीं थक रहे है। 1 मई से चलाई जा रही श्रमिक स्पेशल ट्रेन की तारीफ रेल मंत्री करते नहीं थक रहे हालाकी श्रमिक स्पेशल ट्रेन का चलाना बेहद ज़रूरी था। लेकिन यह कदम केंद्र सरकार को पहले ले लेना चाहिए था, अगर यह कदम केंद्र सरकार पहले ले चुकी होती तो शायद इतने सारे मजदूरों की जान नहीं जाती। रेल मंत्री का कहना है कि 1 मई से 24 मई तक 37 लाख मजदूरों को उनके घर पहुँचाया गया है और मजदूरों को घर पहुँचाने के लिए 2813 श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाई गई है। अगर हम रेल मंत्री के ट्वीट्स पर नजर डाले तो 80% श्रमिक ट्रेनें बिहार और उत्तर प्रदेश में चलाई गई है और साथ ही साथ ऐसा भी लगता है कि महाराष्ट्र, बंगाल, छत्तीसगढ़, राजस्थान, झारखंड जैसे राज्य जहाँ भाजपा कि सरकार नहीं है वैसे राज्य ट्रेनों को मंजूरी नहीं दे रहे हैं। इसी कारण उन राज्यों में ज़्यादा ट्रेनें नहीं चलाई जा रही।

श्रमिक स्पेशल ट्रेन

यह तो थी रेल मंत्री की बाते लेकिन हमें यह जानना बेहद ज़रूरी है कि वास्तव में श्रमिक स्पेशल ट्रेनों का हाल क्या है। अलग-अलग न्यूज़ पेपर्स का कहना है कि लगभग 40 ट्रेनें अपनी स्टेशन से भटक जा रही हैं या फिर लगभग 70 से 80 घंटे लेट चल रही हैं। आपको बता दें कि सूरत से पूर्णिया जाने वाली ट्रेन 4 से 5 दिन लेट पहुँची, पटना से मुगलसराय जाने वाली ट्रेन गया चली गई, विशाखापट्टनम से वाराणसी होते हुए मुजफ्फरपुर जाने वाली ट्रेन को पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर रोक दिया गया।

हम आपको बता दे की मुंबई से गोरखपुर जाने वाली ट्रेन राउरकेला पहुँच गई वहाँ से उसे इलाहाबाद ले जाया गया और इलाहाबाद से गोरखपुर, कुर्ला से पटना जाने वाली ट्रेन पुरुलिया पहुँच गई फिर पुरुलिया से उसे पटना ले जाया गया, बेंगलुरु से बस्ती जाने वाली ट्रेन गाजियाबाद पहुँच गई जिसके बाद गाजियाबाद से उसे बस्ती ले जाया गया, गोवा से बलिया जाने वाली ट्रेन जिसकी दूरी 2200 किलोमीटर है वह ट्रेन नागपुर पहुँच गई नागपुर पहुँचने के लिए ट्रेन ने लगभग 1170 किलोमीटर की दूरी तय की जिसके बाद ट्रेन को नागपुर से बलिया ले जाया गया जहाँ पर ट्रेन ने 1173 किलोमीटर की दूरी तय की। वही बेंगलुरु से छपरा जानें के लिए जहाँ सिर्फ़ 48 घंटे लगते हैं वही श्रमिक स्पेशल ट्रेन को 78 घंटे लग गए हैं।

ऐसी बहुत-सी ट्रेनें हैं जिन्हें जाना कहीं और होता है और चली कहीं और जाती है। मजदूरों को 80-80 घंटे ट्रेन में गुजारना पड़ता है। 24-24 घंटे से भी ज़्यादा भूखे प्यासे रहना पड़ता है। इन ट्रेनों के बारे में रेल मंत्री ने अपने ट्विटर अकाउंट पर कुछ नहीं लिखा है हालांकि रेलवे ने कहा है कि ट्रैफिक ज़्यादा होने के कारण कुछ गलतियाँ देखने को मिल रही है। आपको बता दे कि सामान्य दिनों में रेलवे रोजाना लगभग 6000 ट्रेनें चलती है जिसमें 2.50 से 3 करोड़ यात्री सफ़र करते है और अभी रोजाना लगभग 200 ट्रेनें चलाई जा रही है तो यह कहना ग़लत होगा कि ज़्यादा ट्रैफिक होने के कारण ट्रेनें अपने गंतव्य स्टेशन से भटक रही हैं।

Image Source: Google

 

 

 

 

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