संगठन मजबूत कर रहे बिहार के राजनीतिक दल, साल के आखिर में महासंग्राम!

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साल के आखिर में बिहार राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं। इस बार के चुनाव में कई पार्टियां अपना दमखम ठोंक रही हैं। लेकिन हर बार की तरह इस बार भी दो ही राजनीतिक ध्रुवों के होने की उम्मीद है। हर बार की तरह इस बार भी एनडीए ताल ठोंक रहा है, तो आरजेडी के नेतृत्व में महागठबंधन एनडीए को सत्ता से उखाड़ फेंकने को बेचैन है।

पटना। बिहार की राजनीति में चालें चली जानी शुरू हो गई हैं। तेजश्वी यादव बिहार सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं, तो एलजेपी ने भी 12 अप्रैल को घोषणा पत्र जारी करने की बात कह दी है। वहीं, बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने तो 1 मार्च को जेडीयू की महारैली तक कर दी।

इन सब राजनीतिक घटनाक्रमों के साथ ही बिहार के सभी राजनीतिक दल अपने संगठन को मजबूत करने की कवायद में लग गए हैं। नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू इस कड़ी में सबसे आगे खड़ी दिख रही है, तो बीजेपी एक बार फिर से पन्ना प्रमुखों की तैनाती कर रही है। वहीं, आरजेडी ने भी इस बार संगठन पर जोर देना शुरू कर दिया है, जिसके तहत जिला स्तर पर मजबूत नेताओं को खड़ा किया जा रहा है।

इस बार के चुनाव को लेकर राजनीतिक पार्टियां कितनी सजग हैं, इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि सभी राजनीतिक दलों ने अपने अपने पदाधिकारियों को आदेश दे दिया है कि वो अपने घरों पर पार्टी के झंडे को फहराएं, साथ ही अपने घरों को 24 घंटे लोगों के लिए खुला रखें। ताकि किसी भी कार्यकर्ता को कभी खाली हाथ न लौटना पड़े।

इसी कवायद के तहत राष्ट्रीय जनता दल यानि आरजेडी ने जिला अध्यक्षों के साथ ही जिला महासचिवों की भी तैनाती कर दी है। कुछ जगहों पर जो तैनाती नहीं हुई है, उन्हें पूरा किया जा रहा है।

बता दें कि इस साल के आखिर में बिहार राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं। इस बार के चुनाव में कई पार्टियां अपना दमखम ठोंक रही हैं। लेकिन हर बार की तरह इस बार भी दो ही राजनीतिक ध्रुवों के होने की उम्मीद है। हर बार की तरह इस बार भी एनडीए ताल ठोंक रहा है, तो आरजेडी के नेतृत्व में महागठबंधन एनडीए को सत्ता से उखाड़ फेंकने को बेचैन है।

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