अमेरिका ने जानी दुश्मन को इराक में किया ढेर, इस देश का बन सकता था राष्ट्रपति!

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बगदाद। अरब प्रायद्वीप से अबतक की सबसे बड़ी खबर आ रही है, जिसमें अमेरिका ने अपने दो सबसे बड़े जानी दुश्मनों को बगदाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ढेर कर दिया है। इसके साथ ही आठ अन्य लोग भी मारे गए हैं, जो अमेरिका के दुश्मनों की लिस्ट में शामिल थे। इसमें से अमेरिका को जो सबसे बड़ी सफलता मिली है, वो है ईरान के संभावित राष्ट्रपति कासिम सुलेमानी की हत्या। इसके साथ ही अमेरिका ने इराक के अंदर अपने सबसे बड़े दुश्मनों और ईरान के सबसे बड़े सहयोगियों में से एक पॉपुलर मोबलाइजेशन फोर्सेस के हेड अबू महदी अल मुहांजिश को भी मार गिराया है। इससे अलावा मारे गए 6 अन्य लोगों में एक की पहचान कताइब हिज़्बुल्लाह के वरिष्ठ अधिकारी के तौर पर हुई है।

 

 

अमेरिका पिछले कई दिनों से इन्हें निशाना बनाने की ताक में था। दरअसल, इराक के अंदर हाल में शुरु हुए सबसे बड़े बवाल के पीछे यही तीन लोग मजबूत रणनीतिकार के तौर पर खड़े थे। जिसकी शुरुआत अमेरिकी कॉन्ट्रैक्टर की हत्या से हुई थी। इस हत्या के पीछे अमेरिका ने कताइब हिज़्बुल्लाह और ईरान को जिम्मेदार ठहराते हुए कताइब हिज़्बुल्लाह के ठिकानों पर बमबारी की थी, जिसमें 25 लड़ाके ढेर हो गए थे। इसके बाद इराक की राजधानी बगदाद में शिया मिलिशिया से जुड़े लोग सड़कों पर उतर आए थे और बगदाद के अति सुरक्षित इलाके ग्रीन जोन (जहां दूसरे देशों से दूतावास हैं और आम लोगों की बिना वजह आवाजाही पर रोक है) में घुस गए थे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी दूतावास के सामने खाली पड़े चेक पोस्टों में आग लगा थी और दीवार फांदकर दूतावास के अंदर घुसने की कोशिश भी की थी। इन प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए अमेरिकी सैनिकों ने गोलीबारी भी की थी। इसके तुरंत बाद अमेरिका ने ऐसे मामलों से निपटने के लिए इराक में 750 अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती कर दी थी और दूतावास को पूरी तरह से बंद कर दिया था।

कौन थे मेजर जनरल कासिम सुलेमानी?

ईरान के इंटरनेशनल आर्म्ड फोर्स कुद्स फोर्स के हेड के तौर पर कासिम सुलेमानी को ईरान का संभावित राष्ट्रपति माना जा रहा था। वो मध्य पूर्व के देशों में चल रहे ईरानी ऑपरेशन के मुख्य रणनीतिकार और सबसे बड़े कमांडर थे, जिनकी रिपोर्टिंग ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता और राष्ट्रपति अायतोल्लाह अली खामनेई के पास थी। वो सिर्फ खामनेई को ही रिपोर्ट करते थे और उन्हें ईरान की सीमाओं के बाहर असीमित सैन्य ताकत मिली हुई थी। मेजर जनरल कासिम सुलेमानी की पहचान ईरान में एक बेहद बहादुर और बेखौफ लड़ाके की थी।

 

कुद्स फोर्स के कमांडर जनरल सुलेमानी को ईरान के सुप्रीम लीडर आयतोल्लाह अली खामनेई ने ‘अमर शहीद’ के तौर पर याद किया, जिसने अपने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया है। जनरल सुलेमानी ने यमन से लेकर सीरिया तक और इराक़ से लेकर दूसरे मुल्कों तक रिश्तों का एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया ताकि इन देशों में ईरान का असर बढ़ाया जा सके। इसमें वो काफी हद तक सफल रहे और ईरान ने सीरिया, यमन से लेकर इजरायल के बाहरी इलाकों तक अपनी पकड़ बेहद शानदार तरीके से बनाए रखी। वहीं, हौदी विद्रोहियों के साथ मिलकर सउदी अरब के दो सबसे बड़े तेल कुओं को भी तबाह कर दिया, जिसका पूरी दुनिया पर असर पड़ा।

कैसे हुई मौत की पुष्टि?

 

इन हमलों की पुष्टि कताइब हिज़्बुल्लाह के प्रवक्ता ने की थी। वहीं, अमेरिकी रक्षा विभाग ने बयान जारी कर कहा कि इराक के साथ ही अन्य पड़ोसी देशों में रह रहे अमेरिकी नागरिकों और अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश के बाद यह कदम उठाया गया। चूंकि सुलेमानी और मुहांजिश को पहले ही वैश्विक आतंकवादी करार दिया जा चुका था, ऐसे में उन लोगों को मारने में कोई बुराई नहीं है।

 

अमेरिका ने कहा कि पिछले 27 दिसंबर समेत कई बार अमेरिकी दूतावास और सैनिक ठिकानों पर हुए हमले में ये लोग शामिल थे। और इन्हीं की देखरेख में अमेरिका को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई थी। अमेरिकी रक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि जिस तरह से एयर स्ट्राइक में सुलेमानी समेत 8 लोगों को मारा गया, उस तरह के हमले और भी किए जाते रहेंगे।

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