वादाखिलाफी कर रही बिहार सरकार, उपेंद्र कुशवाहा का धरना सही है?

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अभिषेक रंजन। उपेन्द्र कुशवाहा जी बिहार में केंद्रीय विद्यालय खोलने की मांग को लेकर अनशन पर बैठे है। ये केंद्रीय विद्यालय मोदी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में बिहार को दिए थे परंतु राज्य सरकार की आपत्ति की वजह से लटके हुए हैं। कहा जा रहा है कि राज्य सरकार चाहती है कि इन विद्यालयों में 50% स्थानीय विद्यार्थी रहेंगे, यह बात केंद्र लिखकर दे। केंद्र ऐसी कोई बात लिखकर नही दे सकता। इसी बात पर मामला लटका हुआ है।

इस मसले पर केंद्रीय विद्यालय से जुड़े कई लोगों से बात की है। सबका यही कहना है कि केंद्रीय विद्यालय में प्रवेश का कोई स्थानीय/बाहरी नियम न रहते हुए भी ऐसा कोई विद्यालय नही है जहां स्थानीय विद्यार्थी किसी भी स्थिति में 50% से कम हो। ऐसे में ये जिद तर्कसंगत नहीं लगता है। अच्छा यही होता कि विवाद में विद्यालय को फंसाने की वजाये राज्य सरकार पहल करके केंद्रीय विद्यालय की स्थापना जल्द करती। राज्य की इस पहल से कई बच्चों को फायदा होता, वही इस निवेश से फायदा अन्ततः बिहार की जनता का ही होना है।

कल न्यूज़ 18 बिहार पर कई लोगों की टिप्पणीयां देख रहा था, जिसका मूल भाव यही था कि राजनीति में अपनी प्रासंगिकता बचाए रखने के लिए उपेन्द्र कुशवाहा अनशन कर रहे है। कोई भी बात राजनीति से परे नही है लेकिन मुझे नहीं लगता कि राजनीति में बने रहने के लिए कोई शिक्षा जैसे विषय को बिहार में उठायेगा, जो राजनीतिक ईको सिस्टम द्वारा कही से भी राज्य की जनता के लिए प्राथमिकता में नहीं रहने दी जा रही है। मेरी राय में कुशवाहा जी के लिए ये मुद्दा राजनीति से कही ज्यादा है।

सहमती, असहमति एक तरफ, संभवतः बिहार के वे पहले नेता है जो शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर लगातार बोलते रहे है, शिक्षा से जुड़े कई मुद्दों को लेकर बेहद सक्रिय रहे है। बिहार की Mainstream Politics में शिक्षा का विषय राजनीतिक रूप से अछूत है और शिक्षा व शिक्षकों की राजनीति करने वाले भी बहुत गंभीर नही दिखते। ऐसे में कोई शिक्षा के मसले को लेकर अपनी बात रख रहा है तो उसके मुद्दे को कमतर दिखाने की कोशिश की वजाये उसका सहयोग करना चाहिए।

रही बात केंद्रीय विद्यालय की तो बतौर केंद्रीय मंत्री उनकी जो भी उपलब्धि रही है, उसमें इन दोनों केंद्रीय विद्यालयों को बिहार लाने की कोशिश भी शामिल है। जाहिर है ये विद्यालय स्थापित होंगे तो उन्हें भी व्यक्तिगत रूप से खुशी होगी।

उम्मीद करता हूं कि राज्य व केंद्र की राजनीति में सक्रिय लोग कुशवाहा जी की मांग पर अविलंब ध्यान देंगे और बिहार को मिली सौगात को जाया नही होने देंगे। इस अनशन के बहाने बिहार की शिक्षा व्यवस्था पर नीति नियंताओं का ध्यान गया तो बिहार की उपलब्धि ही होगी। अनशन अपने उद्देश्य में सफल हो, यही मंगलकामना है।

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