Youth Against Rape की मुहिम, बंद हो बच्चियों के खिलाफ यौन अपराध

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मिशन का संदेश समस्त देश तक पहुंचाने हेतु पीयूष ने अपने दो साथियों योगेश और रणछोड़ के साथ 17 अक्टूबर 2019 को 50000 कि.मी. के साईकल अभियान का आरंभ किया। स्वयं निर्भया जी की माता जी श्रीमती आशा देवी ने इन साईकल सवारों को हरी झंडी दिखा कर इस मिशन की शुरुआत जंतर मंतर से की.

हमारे देश में 2012 निर्भया केस के बाद से बलात्कार के मामलों में जिस प्रकार बढ़ोतरी हुई है, उसने इसे देश के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन दिया है। 5 महीने की बच्ची से लेकर 70 वर्ष की महिला तक कोई भी इससे अछूता नहीं रहा। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार हमारे देश में प्रति दिन औसतन 90 महिलाएं बलात्कार का मामला दर्ज कराती हैं। भारत महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित देशों में से एक है। आज जब कोरोना वायरस से बचाव हेतु सम्पूर्ण भारत में लॉकडाउन है, इसके पश्चात भी बलात्कार के मामलों पर विराम नहीं है। बलात्कार हमारे समाज का एक हिस्सा-सा बनता चला जा रहा है। समाज की मानसिकता ही इस ‘रेप वाली मानसिकता’ का आधार है। हमारे समाज के बहुत से बद्धिजीवियों ऐसे हैं जो बलात्कार के लिए स्वयं पीड़िता को ज़िम्मेदार ठहरा देते हैं। उनका मानना है कि लड़कियों के मॉडर्न वस्त्र और उनका देर रात बाहर निकलना बलात्कारियों के लिए आवाहन का कार्य करते हैं। कई व्यक्ति तो बलात्कारियों को बच्चा बता कर उनके लिए क्षमा याचना करते हैं। समाज में गृह कर चुकी इस प्रकार की मानसिकता को विस्थापित करना अनिवार्य है, अन्यथा अपने देश की बेटियों की सुरक्षा असंभव है।

 

इस बलात्कार की समस्या का एक कारण हमारी न्याय प्रणाली की खामियाँ भी हैं। निर्भया केस में इंसाफ पाने के लिए एक माँ को 7 साल का कड़ा संघर्ष करना पड़ा। बलात्कारी लगातार कानून के साथ खिलवाड़ करते रहे और हमारी न्यायपालिका महज़ देखती रह गई। हमें अपने देश को इस जघन्य अपराध से मुक्त कराने की आवश्यकता है।

 

इसी ‘बलात्कार मुक्त भारत’ का स्वप्न संजो कर 22 वर्षीय पीयूष मोंगा ने शुरुआत की ‘युथ अगेंस्ट रेप’ नामक एक संगठन की। इस संगठन की शुरुआत 25 मई 2019 को इंस्टाग्राम के एक पेज से हुई। इस संगठन का लक्ष्य है देश की युवा शक्ति को एकत्र कर इस अपराध के खिलाफ़ मुहीम चलाना। अपने मिशन का संदेश समस्त देश तक पहुंचाने हेतु पीयूष ने अपने दो साथियों योगेश और रणछोड़ के साथ 17 अक्टूबर 2019 को 50000 कि.मी. के साईकल अभियान का आरंभ किया। स्वयं निर्भया जी की माता जी श्रीमती आशा देवी ने इन साईकल सवारों को हरी झंडी दिखा कर इस मिशन की शुरुआत जंतर मंतर से की, जिसके अंतर्गत ये तीनों भारत के प्रत्येक राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों में जाकर जनसमुदाय को इस लड़ाई में सहयोग करने का संदेश देंगे। अब तक ये राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़, झारखंड में अभियान पूर्ण कर चुके हैं और फिलहाल कोरोना वायरस के कारण पटना में रुके हुए हैं। इस संगठन की मांगें है कि बलात्कारियों को आरोप सिद्ध होने पर फाँसी दी जाए, जिन बलात्कारियों को फाँसी की सज़ा मिलने के बाद भी वो निष्पादित नहीं हुई है उनको जल्द से जल्द फाँसी देना, बलात्कार का झूठा आरोप लगाने वाली महिलाओं को 14 वर्ष की कैद एवं सरकार की तरफ से सभी विद्यालयों में सेक्स एजुकेशन को अनिवार्य करना।

सभी शहरों में संगठन की इकाई देश के 21 शहर और 3 यू. टी. में कार्यरत हैं, जो ऑनलाइन अथवा ज़मीनी स्तर पर स्कूलों और सार्वजनिक स्थलों पर जागरूकता अभियान, और जरूरतमंद लोगों को सहायता प्रदान करने के लिए खुशियाँ बांटों अभियान संचालित करती हैं। पीयूष मोंगा जी का ये साहसिक कदम कई युवाओं को प्रेरित करता है तथा इस कदम के लिए उनका परिवार एवं उनके साथी उन पर गर्व करते हैं।

पीयूष बलात्कार मुक्त भारत का सपना पूर्ण करने के लिए अपने संगठन के साथ निरंतर कठिन परिश्रम कर रहे हैं।

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